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अध्याय - 7
1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम [ इतिहास ]


प्रश्न 1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. सन् 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम में बुन्देलखण्ड से प्रमुख सेनानी थे-
(i) कुँवर सिंह,
(ii) बख्तावर सिंह,
(iii) तात्या टोपे,
(iv) अहमदुल्ला खाँ ।

👇 Answer is (iii) तात्या टोपे,







2. सन् 1857 के संग्राम के समय भारत के गवर्नर जनरल थे-
(i) डलहौजी,
(ii) बैंटिंक,
(iii) कैनिंग,
(iv) रिपन।

👇 Answer is (i) डलहौजी,







3. ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना हुई थी-
(i) 1705 ई. में
(ii) 1600 ई. में
(iii) 1800 ई. में
(iv) 1830 ई. में।

👇 Answer is 3. (ii) 1600 ई.







4. 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम में बुन्देलखण्ड के प्रमुख सेनानी थे-
(i) कुँवर सिंह
(ii) बख्तावर सिंह
(iii) तात्या टोपे
(iv) अहमदुल्ला खाँ।

👇 Answer is 4. (iii) तात्या टोपे,







5. कानपुर में क्रान्ति का नेतृत्व किया-
अथवा कानपुर में आन्दोलन शुरू किया था-
(i) रानी लक्ष्मीबाई ने
(ii) तात्या टोपे ने
(iii) नाना साहब ने
(iv) बहादुरशाह ने।

👇 Answer is 5. (iii)नाना साहब ने,







6. 1857 के संग्राम के समय भारत के गवर्नर जनरल थे-
(i) डलहौजी
(ii) बैंटिंक
(iii) कैनिंग
(iv) रिपन।

👇 Answer is 6. (iii) कैनिंग,







7. पंजाब के गवर्नर ओ. डायर की गोली मारकर हत्या की थी-
(i) भगत सिंह ने
(ii) चन्द्रशेखर आजाद ने
(iii) ऊधम सिंह ने
(iv) मंगल पाण्डे ने।

👇 Answer is 7. (iii) ऊधम सिंह ने,







8. निम्नलिखित में से कौन उदारवादी विचारों का नहीं था ?
(i) दादाभाई नौरोजी
(ii) अरविन्द घोष
(iii) गोपाल कृष्ण गोखले
(iv) फिरोजशाह मेहता।

👇 Answer is 8. (ii) अरविन्द घोष .






प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-



1. बहादुरशाह द्वितीय को बन्दी बनाकर ....................स्थान पर भेज दिया गया।
👇 Answer is 1. रंगून (बर्मा)






2. लॉर्ड डलहौजी ने................नीति के कारण अनेक राज्यों को अंग्रेजी राज्य में शामिल कर लिया।
👇 Answer is , 2. हड़प (विलय)




3. ब्रिटिश संसद ने सन् 1858 के अधिनियम के अनुसार भारत पर शासन करने का अधिकार ................. को दे दिया।

👇 Answer is , 3. ब्रिटिश सरकार







4. दिल्ली की जनता ने ..................... को भारत का सम्राट घोषित किया।

👇 Answer is , 4. बहादुरशाह द्वितीय,







5. अंग्रेजी इतिहासकारों ने सन् 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम को..................कहना स्वीकार किया।

👇 Answer is 5. सैनिक विद्रोह,







6. नाना साहब का निवास .................. मे था ।

👇 Answer is 6. बिठूर




प्रश्न 3. अति लघु उत्तरीय प्रश्न



प्रश्न 1. उन क्षेत्रों के नाम लिखिए जहाँ 1857 ई. का स्वतन्त्रता सग्राम व्यापक रूप से हुआ ?

Answer is उत्तर-बंगाल, मेरठ, दिल्ली, अवध, कानापुर, रुहेलखण्ड, झाँसी अलीगढ़, मथुरा, आगरा, बदायूँ, विहार के अधिकांश भागों, कोटा, जोधपुर आदि नगरों में सन् 1857 का स्वतन्त्रता संग्राम व्यापक रूप से हुआ।,







प्रश्न 2. सन् 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं के नाम बताइए।

Answer is उत्तर-मंगल पाण्डे, बहादुरशाह द्वितीय, रानी लक्ष्मीबाई. तात्या टोपे, नाना साहब तथा बगम हजरतमहल आदि सन् 1857 में स्वतन्त्रता संग्राम के प्रमुख नेता थे।







प्रश्न 3. 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम का तात्कालिक कारण क्या था ?

Answer is उत्तर-बैरकपुर छावनी में 29 मार्च, 1857 को मंगल पाण्डे नामक सैनिक ने चर्बी वाले कारतूस को भरने से इंकार कर दिया और उत्तेजित होकर अंग्रेज अधिकारियों की हत्या कर दी। फलस्वरूप उसे बन्दी बनाकर 8 अप्रैल, 1857 को फाँसी दे दी गयी। इस प्रकार चर्बी लगे कारतूस ।857 की क्रान्ति का तात्कालिक कारण बना।







प्रश्न 4. हड़प नीति क्या थी ?

Answer is उत्तर-इसे विलय नीति भी कहा जाता है। लॉर्ड डलहौजी द्वारा कम्पनी के अधीन देशी राज्यों के सन्तानहीन शासकों को गोद लेने के अधिकार से वंचित कर उनके राज्य को हड़प लेना ही हड़प नीति थी।,




प्रश्न 4 .लघु उत्तरीय प्रश्न




प्रश्न 1.सन् 1857 के संग्राम को प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम क्यों कहा जाता है ?

Answer is उत्तर-1857 में भारत की जनता, सैनिकों व देशी रियासतों ने विदेशी शासन से मुक्ति पाने के लिए बहादुरी से व्यापक स्तर पर संघर्ष किया जिसकी व्यापकता और शक्ति के सामने ब्रिटिश शासन की नीव डगमगा उठी थी। इस कारण इसे सन् 1857 का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम कहा जाता है।,







प्रश्न 2. सन् 1857 के पूर्व ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह अपनी आरम्भिक अवस्था में क्यों असफल रहे ?

Answer is उत्तर - सन् 1857 के पूर्व क्रिटिश शासन के विरुद्ध भीलों का विद्रोह, गोंडों का विद्रोह, खोंड़ों का विद्रोह, कोलियों का विद्रोह, मेडों का विद्रोह, संधालों का विद्रोह तथा खासियों का विद्रोह आदि अनेक विद्रोह हुए, परन्तु इनका स्वरूप स्थानीय रहा तथा किसी जाति विशेष तक सीमित रहा। अतः ये अपनी आरम्भिक अवस्था में ही असफल हो गये।,







प्रश्न 3. भारतीय शासकों में असन्तोष के क्या कारण थे ?

Answer is उत्तर-लॉर्ड वेलेजली की सहायक सन्धि व्यवस्था और. लॉर्ड डलहौजी की हड़प नीति के कारण अनेक राज्यों को जवरदस्ती अंग्रेजी साम्राज्य में विलय कर दिया गया सरकार ने अवध, तंजौर, कर्नाटक के नवाबों की राजकीय उपाधियाँ समाप्त कर राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न कर दी। अन्तिम मुगल सम्राटों के प्रति अंग्रेजों का व्यवहार अनादरपूर्ण होता चला गया। इन परिस्थितियों में शासन-परिवारों में घबराहट फैल गई जो अन्तत: भारतीय शासकों में असन्तोष का कारण बनी।







प्रश्न 4. प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम का राजनैतिक व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा ?

Answer is उत्तर-प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम ने अंग्रेजी साम्राज्य की जड़ों को हिलाकर रख दिया। अत: ब्रिटिश सरकार ने भारत में अनेक प्रशासनिक परिवर्तन किये जैसे भारत पर शासन करने का अधिकार ईस्ट इण्डिया कम्पनी से लेकर सीधे इंग्लैण्ड की सरकार ने लिया।.







प्रश्न 5. सन् 1857 के संग्राम के असफलता के कारण बताइए।

Answer is उत्तर-प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम (1857 की क्रान्ति) की असफलता के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे- 
(1) 1857 की क्रान्ति निर्धारित तिथि से पूर्व प्रारम्भ कर दी गयी थी जिससे यह असफल हो गयी। मैलसन के अनुसार, "यदि यह क्रान्ति निश्चित समय परं प्रारम्भ होती तो इसे सफलता अवश्य मिलती।"
 (2) 1857 की क्रान्ति की असफलता का अन्य कारण योग्य नेतृत्व का अभाव था। विद्रोही नेताओं में सैनिक कुशलता तथा संगठित होकर कार्य करने तथा क्रान्ति संचालन की क्षमता का अभाव था।
(3) 1857 की क्रान्ति के समय अधिकांश नरेशों ने क्रान्तिकारियों का साथ न देकर अंग्रेजों का ही साथ दिया। सर जॉन के मत में, "यदि समस्त भारतवासी पूर्ण उत्साह से अंग्रेजों के विरुद्ध संगठित हो जाते तो अंग्रेज पूर्णतया नष्ट हो जाते।"
(4) क्रान्तिकारियों में वीरता तथा साहस की भावना का अभाव नहीं था, परन्तु उनकी सैनिक शक्ति अत्यधिक निर्बल थी।
(5) अंग्रेज अधिकारी क्रान्तिकारियों का दमन आधुनिक हथियारों से करते थे, परन्तु क्रान्तिकारियों के पास उनका सामना करने के लिए आधुनिक हथियारों का अभाव था।,




प्रश्न 6.दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions) 


प्रश्न 1. सन् 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम का भारतीय इतिहास में क्या महत्व है ?

Answer is उत्तर-सन् 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम में हालांकि पराजय का सामना करना पड़ा परन्तु इस क्रान्ति के बड़े गहरे और दूरगामी परिणाम सामने आये, जो भारतीय आन्दोलन के इतिहास में भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने । इस क्रान्ति ने अंग्रेजी साम्राज्य की जड़ों को हिलाकर रख दिया था। अतः ब्रिटिश सरकार ने भारत में अनेक प्रशासनिक परिवर्तन किये। इन।परिवर्तनों के कारण भारतीय समाज, अर्थव्यवस्था और सरकार।में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए जो निम्नवत् हैं- 
(i) ब्रिटिश संसद ने सन् 1858 में एक अधिनियम पारित किया। इसके अनुसार भारत पर शासन करने का अधिकार ईस्ट इण्डिया कम्पनी से लेकर सीधे इंग्लैण्ड की सरकार ने ले लिया।
(ii) अंग्रेजों ने 'फूट डालो और राज करो' की नीति का पालन करते हुए भारतीय सेनाओं का संगठन किया।
(iii) ब्रिटिश शासन ने देशी रियासतों का विलय करने की नीति में परिवर्तन किया और उत्तराधिकारियों को गोद लेने के अधिकार को मान्यता प्रदान की। देशी रियासत के शासकों को यह आश्वासन दिया गया कि अब किसी रियासत का विलय नहीं किया जायेगा।
(iv) ब्रिटिश सरकार ने राजाओं, भू-स्वामियों और जर्मींदारों के प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाया और इस प्रकार उनका समर्थन प्राप्त करने की नीति अपनाई। इस संग्राम में जाति और धर्म की सभी बाधाएँ समाप्त हो। गयी थीं। हिन्दू और मुसलमान पहले से भी अधिक अटूट बन्धन में बैध गये इस संग्राम ने भारत की भावी पीढ़ी को संघश् लिए सदैव प्रेरित किया। सन् 1857 के संग्राम ने स्वतन्त्रता की भावनाओं का बीजारोपण किया तथा इससे देश की सांस्कृतिक एकता को बल मिला।








प्रश्न 2. टिप्पणी लिखिए-
(क) तात्या टोपे,
(ख) रानी लक्ष्मीबाई,
(ग) नाना साहब,
(घ) हजरतमहल।



(क) तात्या टोपे, Answer is उत्तर-(क) तात्या टोपे-तात्या टोपे सन् 1857 के वीर सेनानियों में से एक थे। तात्या टोपे अपनी देशभक्ति, वीरता, व्यूह रचना, शत्रु को चकमा देने की कुशलता, साधनहीनता की स्थिति में युद्ध जारी रखने का साहस, निर्भीकता और गुरिल्ला पद्धती के लिए जाने जाते हैं। पेशवा नाना साहब की ओर से युद्ध का समस्त उत्तरदायित्व उनके स्वामिभक्त तात्या टोपे पर ही था। रानी लक्ष्मीबाई के साथ ग्वालियर पर अधिकार करने ें तात्या टोपे का बड़ा योगदान रहा। रानी लक्ष्मीबाई की मल पश्चात् तात्या ने निरन्तर गुरिल्ला युद्ध के माध्यम से मध्य भारत और बुन्देलखण्ड में अंग्रेजों को बड़ी टक्कर दी। अंग्रेजों ने ताल्या टोपे को बन्दी बनाने के लिए कुटिलता और विश्वासघात की।नीति का पालन किया। अन्ततः तात्या टोपे को आरौन (जिला गुना) के जंगल में विश्राम करते समय बन्दी बनाया गया। अंग्रेजों ने 18 अप्रैल, 1859 को तात्या टोपे को शिवपुरी में फाँसी दे दी।







(ख) रानी लक्ष्मीबाई,
Answer is (ख) रानी लक्ष्मीबाई-अंग्रेजों ने सन् 1854 में झाँसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु के पश्चात् उनकी रानी लक्ष्मीबाई के दत्तक पुत्र को झाँसी की गद्दी का उत्तराधिकारी मानने से इन्कार कर दिया तथा झाँसी को अंग्रेजी साम्राज्य में विलय कर लिया। इसका विरोध करते हुए रानी लक्ष्मीबाई ने ब्रिटिश सेना से भयंकर टक्कर ली। सर ह्यरोज द्वारा पराजित होने पर वह कालपी आर्यी व तात्यां टोपे की मदद से ग्वालियर पर अधिकार कर लिया। अंग्रेज सेनापति ह्यरोज ने ग्वालियर आकर किले को घेर लिया। 17 जून, 1858 को झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई बड़ी वीरता से सैनिक के वेश में संघर्ष करती हुई वीरगति को प्राप्त हुईं।। उनकी वीरता की गाथाएँ आज भी देशवासियों को प्रेरित करती हैं।







(ग) नाना साहब,
Answer is (ग) नाना साहब-नाना साहब, सग्राम के अन्य महत्त्वपूर्ण नेता थे। नाना साहब भूतपूर्व पेशवा बाजीराव द्वितीय के पुत्र थे और बिठूर में निवास करते थे। पेशवा की मृत्यु के उपरान्त लॉर्ड डलहौजी ने नाना साहब को पेंशन एवं उपाधि देने से वंचित कर दिया था। अत: नाना ने अपने स्वामिभक्त सैनिकों की मदद से अंग्रेजों को कानपुर से निकालकर स्वयं को पेशवा घोषित कर दिया। तात्या टोपे और अजीमुल्ला नाना साहब के स्वामीभक्त सेनानायक थे।







(घ) हजरतमहल
Answer is (घ) हजरतमहल-बेगम हजरतमहल अवध के नवाब की विधवा थीं, स्वतन्त्रता संग्राम आरम्भ होने पर 4 जून, 1857 को अवध की बेगम ने संग्राम को प्रोत्साहन दिया और उसका संचालन किया। उसने अपने युवा पुत्र विराजिस कादर को अवध का नवाक योषित कार दिया लथा लखनऊ स्थित विटिश रेजीडेन्सी आऊण किया। केरन हकरहमहल ने शाहजहाँचुर में भी का नेनुन्त किया। पराजित होने के बाद बेगम सुरक्षा की दृष्टि से नेपाल चली गई ।











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