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social science imp question class 10 2021 mp board अध्याय 12 भारतीय संविधान

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अध्याय 12
भारतीय संविधान



सामाजिक विज्ञान Class 10th राजनीति chapter-12 mp board





प्रश्न 1. सही विकल्प चुनकर लिखिए


1. संविधान है-








👇 Answer is (iii) नियम व कानूनों का संकलित प्रलेख,







2. निम्न में से कौन-सी विशेषता भारतीय संविधान की नहीं है ?









👇 Answer is (iv) अलिखित संविधान,,






3. संविधान में मौलिक कर्त्तव्य कितने बताये गये हैं ?








👇 Answer is 3. (iv) 10 ।,











प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-



1. संविधान सभा के अध्यक्ष..............थे।

👇 Answer is उत्तर-1. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद,,







2. डॉ. बी. आर. अम्बेडकर संविधान की .................अध्यक्ष थे।

👇 Answer is , 2.प्रारूप समिति,,








3. भारत का नवनिर्मित संविधान, संविधान सभा द्वारा .................... को अंगीकृत किया गया।।


👇 Answer is 3. 26 नवम्बर, 1949, चटर्जी,







4. समानता का अधिकार संविधान में वर्णित....................में से एक है।

👇 Answer is 4. मौलिक अधिकारों।।








5. संसदीय शासन प्रणाली में राष्ट्रपति .................. का शासक होता है

👇 Answer is 5. नाममात्र







प्रश्न 3. अति लघु उत्तरीय प्रश्न



प्रश्न 1. संविधान क्या है ?

Answer is उत्तर-किसी देश का शासन जिन मूलभूत नियमों एवं कानूनों के अनुसार चलाया जाता है, उनके संकलित प्रलेख को संविधान कहते हैं।






प्रश्न 2. भारत में मौलिक अधिकारों का संरक्षक कौन है ?

Answer is उत्तर- भारत में मौलिक अधिकारों की संरक्षक न्यायपालिका है।







प्रश्न 3. संविधान में मौलिक कर्त्तव्य कब जोड़े गये ?

Answer is उत्तर- संविधान 1976 में 42वें संशोधन द्वारा मौलिक कर्त्तव्य जोड़े गये। ।





प्रश्न 4 .लघु उत्तरीय प्रश्न




प्रश्न 1. संविधान का क्या महत्व है ? लिखिए।

Answer is उत्तर-शासन व्यवस्था के सुचारु संचालन हेतु व्यवस्थापिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका का गठन एवं उनके कार्यों और अधिकारों की सीमाओं के निर्धारण के लिए संविधान की महती आवश्यकता होती है। संविधान के अभाव की स्थिति पैदा होने की प्रबल सम्भावना रहती है। संविधान मे नागरिकों के मूल अधिकार एवं व्यक्तियों का भी विवरण होता है।संविधान शासन व्यवस्था का आधार है।।







प्रश्न 2. संविधान सभा का परिचय दीजिए।

Answer is उत्तर-भारत का संविधान एक संविधान सभा द्वारा निर्मित किया गया। संविधान सभा का गठन ब्रिटिश शासन तथा भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के नेतृत्वकर्त्ताओं के मध्य परस्पर सहमति से किया गया। उसका आधार 1946 की केबिनेट मिशन योजना रही। संविधान सभा के सदस्य का चुनाव तत्कालीन प्रान्तीय विधानसभाओं द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव के आधार पर किया गया। संविधान सभा में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, प. जवाहरलाल नेहरू, का सुचारु रूप से संचालित होना कठिन है और अराजकता सरदार पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, श्यामा प्रसाद मुखर्जी व सरदार बल्देव सिंह आदि ने विचार-विमर्श के समय संविधान सभा का पथ प्रदर्शन करने में मुख्य भूमिका का निर्वाह किया।







प्रश्न 3. मध्य प्रदेश से सम्बन्धित संविधान सभा के प्रमुख सदस्यों के नाम लिखिए।

Answer is उत्तर-पण्डित रविशंकर शुक्ल, सेठ गोविन्द दास, डॉ. हरिसिंह गौर व हरिविष्णु कामथ आदि मध्य प्रदेश से सम्बन्धित संविधान सभा के प्रमुख सदस्य थे।







प्रश्न 4. राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्वों से क्या आशय है ?

Answer is उत्तर- भारतीय संविधान के चौथे भाग में शासन सचालन के लिए मूलभूत सिद्धान्तों का वर्णन किया गया है, इन्हें राष्ट तत्त्व आधुनिक प्रजातन्त्र के लिए राजनीतिक, सामाजिक त के नीति निर्धारण करने वाले निर्देशक तत्त्व कहा गया है। ये आर्थिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं । नीति-निर्देशक तत्त्वों को किसी न्यायालय द्वारा परिवर्तित नहीं कराया जा सकता किन्तु ये तत्त्व देश के शासन में मूलभूत स्थान रखते हैं। इन तत्त्वों के माध्यम से भारत में एक लॉक कल्याणकारी राज्य की स्थापना का प्रयास किया गया है।।







प्रश्न 5. संविधान में प्रस्तावना का क्या महत्व है ?

Answer is उत्तर-संविधान की प्रस्तावना में संविधान निर्माताओं े संविधान निर्माण के लक्ष्यों, मूल्यों एवं विचारों का समावेश किया है। इसे संविधान की आत्मा अथवा कुरजी भी कहा जाता है। प्रस्तावना संविधान निर्माताओं की मनोभावना एवं संकल्प का प्रतीक है।







प्रश्न 6. समाजवादी एवं पंथनिरपेक्षता का आशय समझाइए।

Answer is
 उत्तर-समाजवादी राज्य से आशय है कि भारतीय व्यवस्था समाज के समतावादी ढाँचे' पर आधारित होगी। प्रत्येक भारतीय की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति की जाएगी। भारतीय परिस्थिति के अनुसार समाजवाद को अपनाया जायेगा। संविधान में पंथनिरपेक्ष राज्य का आदर्श रखा गया है। इसका आशय है कि राज्य सभी पंथों की समान रूप से रक्षा करेगा और स्वयं भी किसी पंथ को राज्य के धर्म के रूप में नहीं मानेगा। सरकार द्वारा नागरिकों के मध्य पंथ के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति को अपने विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतन्त्रता है।





प्रश्न 5.दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions) 




प्रश्न 1, भारतीय संविधान की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

Answer is उत्तर-भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
(1) लिखित एवं विशाल संविधान-भारत का संविधान लिखित संविधान है। भारत का संविधान विश्व का सबसे विशाल संविधान है। भारत के संविधान में 395 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियाँ हैं जो 22 भागों में विभाजित हैं।

(2) कठोर एवं लचीलेपन का सम्मिश्रण-भारत के संविधान में संशोधन की तीन प्रक्रियाओं का उल्लेख है, जिसके अनुसार संविधान के कुछ प्रावधान संसद के साधारण बहुमत से, कुछ प्रावधानों में विशिष्ट बहुमत से तथा महत्त्वपूर्ण शेष प्रावधानों में संसद के विशिष्ट बहुमत के साथ-साथ आधे राज्यों के अनुसमर्थन से बदले जा सकते हैं। इस दृष्टि से भारत का संविधान लचीला व कठोर का सम्मिश्रण है।

(3) सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न-सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न का अर्थ है कि भारत अपनी आन्तरिक व विदेश नीति का निर्धारण स्वयं करेगा। भारत पर किसी विदेशी सत्ता का अधिकार नहीं भारत अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में अपनी इच्छानुसार आचरण कर सकता है।

(4) समाजवादी एवं पंथ निरपेक्षता-भारतीय व्यवस्था 'समाज के समतावादी ढाँचे' पर आधारित होगी तथा प्रत्येक भारतीय की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति की जाएगी। राज्य सभी पंथों की समान रूप से रक्षा,करेगा और स्वयं किसी भी पंथ को राज्य के धर्म के रूप में नहीं मानेगा। सरकार द्वारा नागरिकों के मध्य पंथ के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा।

(5) संसदीय शासन प्रणाली-इस शासन प्रणाली में कार्यपालिका की वास्तविक शक्तियाँ मन्त्रिपरिषद् में निहित होती हैं तथा राष्ट्रपति नाममात्र का शासक होता है।






प्रश्न 2. भारत का संविधान लिखित एवं विस्तृत क्यों है ? वर्णन कीजिए ।
Answer is उत्तर- किसी देश का संविधान, उस देश की राजनीतिक व्यवस्था का बुनियादी ढाँचा निर्धारित करता है। संविधान में शासन के सभी अंगों (व्यवस्थापिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) का रचना, शक्तियाँ, कार्यों और दायित्वों का उल्लेख होता है। संविधान शासन के अंगों और नागरिकों के मध्य सम्बन्धों को भी विनियमित करता है। भारतीय संविधान केवल एक राजनीतिक प्रलेख (दस्तावेज) ही नहीं है, अपितु इससे बहुत अधिक है। भारत का सविधान भारत की सांस्कृतिक और राष्टरीय अस्मिता को अपने अन्दर समेटे हुए है। भारतीय संविधान देश के आदर्शों को भी प्रकट करता है। संविधान जनता की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक प्रकृति, आस्था एवं आकांक्षाओं पर आधारित है। उपरोक्त सभी कारण मिलकर, भारत के संविधान को सबसे विशाल बनाते हैं तथा संविधान में लिखित रूप देकर इसे सर्वोच्च स्थिति प्रदान की गई है। सर्वोच्च न्यायालय इसका रक्षक है, इसे ही संविधान की व्याख्या करने और केन्द्र व राज्यों के बीच उत्पन्न संवैधानिक विवादों के निर्णय का अधिकार है।







प्रश्न 3. संघात्मक व संसदीय शासन व्यवस्था का वर्णन कीजिए।
👇 Answer is उत्तर-संघात्मक शासन व्यवस्था-भारतीय संविधान के प्रथम अनुच्छेद के अनुसार भारत राज्यों का एक संघ है। इस प्रकार भारत में संघात्मक शासन की व्यवस्था की गई है। संविधान ने शासन की शक्ति को एक स्थान पर केन्द्रित न कर केन्द्र और राज्य सरकारों में विभाजित किया है और दोनों ही अपने-अपने क्षेत्र के निर्णय लेने के लिए स्वतन्त्र हैं। संविधान लिखित और बहुत सीमा तक कठोर है। सर्वोच्च न्यायालय संविधान का रक्षक है, जिसे संविधान की व्याख्या करने और केन्द्र और राज्यों के बीच उत्पन्न संवैधानिक विवादों के निर्णय का अधिकार है। संसदीय शासन व्यवस्था- भारतीय संविधान द्वारा देश में संसदीय शासन प्रणाली की स्थापना की गई । इस शासन प्रणाली में कार्यपालिका की वास्तविक शक्तियाँ मन्त्रिपरिषद् में निहित होती हैं तथा राष्ट्रपति नाममात्र का शासक होता है। इस प्रणाली में मन्त्रिपरिषद् सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धान्त का अनुसंरण करती है। लोकसभा में सरकार के विरुद्ध अविश्वास पारित होने की स्थिति में मन्त्रिपरिषद् को त्यागपत्र देना होता है।






प्रश्न 4. संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों एवं कर्त्तव्यों का वर्णन कीजिए।
👇 Answer is उत्तर-मौलिक अधिकार-भारत के संविधान में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का प्रावधान है। वे ऐसे अधिकार हैं जो न्याय योग्य हैं अर्थात् जिनका उल्लंघन होने पर नागरिक न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय की शरण ले सकता है पर संकटकाल में इन अधिकारों को प्रतिबन्धित किया जा सकता है। मौलिक अधिकार निम्नलिखित हैं- 3. (1) समानता का अधिकार,

(2) स्वतन्त्रता का अधिकार,

(3) शोषण के विरुद्ध अधिकार,

(4) धार्मिक स्वतन्त्रता का अधिकार,

(5) संस्कृति व शिक्षा का अधिकार,

(6) संवैधानिक उपचारों का अधिकार।

मौलिक कर्त्तव्य-संविधान के 42वें (संशोधन) 1976के द्वारा संविधान में एक नया प्रावधान मूल कर्तव्य' जोड़ा है। उसके द्वारा नागरिकों के निम्नलिखित 10 मौलिक कर निश्चित किये गये हैं- भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य होगा कि वह-राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे।

(1) संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थानों, करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोये रखे और पालन करे ।

(2) स्वतन्त्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखें और पालन करे।

(3) भारत की सम्प्रभुता, एकता और अखण्डता की र करे और उसे अक्षुण्य रखे।

(4) देश की रक्षा करे और आह्वान किये जाने पर राष्ट्र की सेवा करें।

(5) भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रानळा की भावना का निर्माण करे जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हैं।

(6) हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्व समझे और इसका परिरक्षण करे।

(7) प्राकृतिक पर्यावरण की जिसके अन्तर्गत वन, झील. नदी और अन्य जीव आदि आते हैं, की रक्षा करे और उनका संवर्द्धन करे तथा प्राणि मात्र के प्रति दया रखे।

(8) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार को भावना का विकास करे।

(9) सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे।

(10) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों ें उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास करे, जिससे राष्ट्र निरन्तर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले।







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