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अर्थशास्त्र महत्वपूर्ण प्रश्न 2021 मध्य प्रदेश बोर्ड 11th economics very imp महत्वपूर्ण प्रश्न 2021

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प्रश्न 1. प्राथमिक समंक से क्या आशय है ?
Answer is
उत्तर- प्राथमिक समंकों से आशय ऐसे समंकों से है, जो अनुसन्धानकर्त्ता द्वारा स्वयं.एकत्रित किये जाते हैं। प्राथमिक समंक मौलिक होते हैं, क्योंकि वे समंक नये सिरे से एकत्रित किये जाते हैं। उदाहरण के लिए, किसी फैक्ट्री के श्रमिकों के दैनिक खर्च से सम्बन्धित समंक एकत्रित करने हैं, जो अनुसन्धानकर्त्ता द्वारा एक-एक श्रमिक के पास प्रत्यक्ष रूप से जाकर समंक प्राप्त किये जाते हैं।।








प्रश्न 2. प्राथमिक समंक के संग्रहण हेतु किन्हीं दो स्रोतों के नाम लिखिए। अथवा प्राथमिक समंकों के संकलन की कोई दो विधियाँ लिखिए ।

Answer is
उत्तर- (1) प्रत्यक्ष व्यक्तिगत अनुसन्धान,
(2) सूचकों द्वारा प्रश्नावली भरवाकर सूचना प्राप्त करना।







प्रश्न 3. द्वितीयक समंकों से क्या आशय है ?

Answer is
उत्तर-द्वितीयक समंकों से आशय ऐसे समकों से है जिनका संकलन किसी अन्य व्यक्ति या संगठन द्वारा हो चुका है और अनुसन्धानकर्त्ता केवल उनका प्रयोग करता है।








प्रश्न 4. द्वितीयक आँकड़ों के क्या स्रोत हैं ?

Answer is
-अन्तर्राष्ट्रीय प्रकाशन, सरकारी प्रकाशन, अ्द्-सरकारी प्रकाशन, अनुसन्धान संस्थाओं के प्रकाशन, पत्र -पत्रिकाएँ एवं व्यापारिक संस्थाओं के प्रकाशन।








प्रश्न 5. राष्ट्रीय न्यादर्श सर्वे क्षण संगठन (National Sample Survey Organisation) की स्थापना कब की गई ?

Answer is
उत्तर-राष्ट्रीय न्यादर्श सर्वेक्षण संगठन (N.S.S.O) की स्थापना सन् 1950 में की गई। वर्तमान समय में, यह तथ्य एकत्रण की प्रमुख संस्था है और देश की सांख्यिकीय व्यवस्था में इसका विशिष्ट स्थान है।








प्रश्न 6. जनगणना से क्या आशय है? भारत में प्रथम विधिवत् जनगणना कब हुई?

Answer is
उत्तर-संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के अनुसार, "जनगणना से आशय एक सुनिश्चित.समयव देश या क्षेत्र में रहने वाले सभी व्यक्तियों के सम्बन्ध में जनांकिकीय, आर्थिक एवं सामाजिक तथ्यों के संकलन, सम्पादन एवं प्रकाशन करने की सम्पूर्ण प्रक्रिया से है।" भारत में पहली जनगणना सन् 1872 में आयोजित की गयी थी। परन्तु इस जनगणना में अनेक त्रुटियाँ थीं। इसलिए, सन् 1881 की जनगणना को भारत की प्रथम विधिवत जनगणना माना जाता है।








प्रश्न 7. समंकों के वर्गीकरण से क्या आशय है ?

Answer is
उत्तर-संकलित समंकों को किसी गुण के आधार पर समान व असमान अलग-अलग वर्गों में बाँटने की प्रक्रिया को वर्गीकरण कहा जाता है।








प्रश्न 8. चित्रलेख (Pictogram) क्या है ? समझाइए।

Answer is
उत्तर-इसके अन्तर्गत समंकों को सम्बन्धित वस्तुओं के आकर्षक चित्रों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। उदाहरणार्थ, जनसंख्या को मनुष्य के चित्रों द्वारा, मुद्रा की आपूर्ति को रुपये की थैली बनाकर प्रदर्शित किया जा सकता है। यह समंकों के अनुपात में बनाये जाते हैं। इन चित्रों को एक सामान्य व्यक्ति भी आसानी से समझ सकता है।








प्रश्न 9. सारणीयन के दो महत्व लिखिये

Answer is
उत्तर-(1) सारणीयन द्वारा विशाल तथ्यों को थोड़े संक्षिप्त रूप में व्यक्त किया जाता है, जिससे समय तथा स्थान की बचत होती है।
(2) सारणियों में प्रविष्ट तथ्यों को बिन्दु-रेखा एवं चित्रों के रूप में सरलता से प्रस्तुत किया जा सकता है।








प्रश्न 10.प्राथमिक व द्वितीयक समंक में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
अथवा प्राथमिक समंकों की कोई दो विशेषताएँ लिखिए ।
अथवा द्वितीयक समंकों की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।

Answer is
उत्तर-प्राथमिक एवं द्वितीयक समंकों में अन्तर 1.प्राथमिक समंक (Primary Data)
1. प्राथमिक समंक मौलिक होते हैं ।सांख्यिकीय अनुसंधान में उनका स्थान कच्चे माल के समान होता है।
2. प्राथमिक समंक अनुसन्धानकर्ताद्वारा किसी भी रीति से स्वयं संकलित किये जाते हैं।
3. प्राथमिक समंकों में धन, समय, श्रम तथा बुद्धि का प्रयोग अधिक करना पड़ता है।
4. प्राथमिक समंक उद्देश्य को ध्यान में रखकर संकलित किये जाते हैं। अत: ये अनुसन्धान के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं।
5. प्राथमिक समंक स्वयं अपने उद्देश्य के लिए एकत्रित कराये जाते हैं।
2.द्वितीयक समंक (Secondary Data) 1.द्वितीयक समंक सांख्यिकी यन्त्रों से एक बार गुजर चुके होते हैं। इनका स्थान निर्मित माल के समान होता है। 2.द्वितीयक समंक अन्य अनुसन्धानकर्त्ता द्वारा पहले से ही संकलित होते हैं। 3. द्वितीयक समंक सरलता से उपलब्ध हो जाते हैं। उनमें अधिक धन, समय, श्रम तथा बुद्धि का प्रयोग नहीं करना पड़ता। 4.द्वितीयक समंक अपने उद्देश्य के अनुकूल हों, यह आवश्यक नहीं है। उनमें प्रायः संशोधन की आवश्यकता होती है तथा उन्हें अनुसन्धान के अनुकूल बनाना पड़ता है। 5.द्वितीयक समक कोई अन्य पक्ष उसके अपने उद्देश्य के लिए एकत्रित कराता है।







प्रश्न 11. प्रश्नावली व अनुसूची क्या है ? इनकी क्या उपयोगिता है ?

Answer is
उत्तर-प्राथमिक समंकों के संकलन में प्रश्नावली और अनुसूची का व्यापक प्रयोग किया जाता है, यद्यपि सामान्य रूप में दोनों को पर्यायवाची मान लिया जाता है। प्रश्नावली एक ऐसा फार्म या प्रपत्र है जिसमें विषय से सम्बन्धित अभीष्ट तथा विस्तृत जानकारी प्राप्त करने हेतु प्रश्नों का क्रमानुसार तथा प्राथमिकतानुसार ब्यौरा होता है, जिसका उत्तर सूचकों द्वारा दिया जाता है। साख्यिकीय अनुसन्धान की सफलता मुख्य रूप से प्रश्नावली की उत्तमता पर निर्भर करती है। एक उत्तम प्रश्नावली तैयार करने के लिए उच्चकोटि की योग्यता, दक्षता एवं अनुभव की आवश्यकता होती है।








प्रश्न 12. संगणना तथा निदर्शन रीति में अन्तर बताइए। अथवा
संगणना व प्रतिचयन रीति में अन्तर लिखिए।

Answer is
उत्तर- संगणना एवं निदर्शन विधि में अन्तर संगणना विधि
1.इसमें प्रत्येक इकाई का गहन अध्ययन होता है तथा परिणामों में उच्चस्तरीय विश्वसनीयता विद्यमान होती है।
2. इस विधि में समय अधिक लगता है।औरनिष्कर्ष निकालने में विलम्ब हो जाता है।
3. यह विधि खर्चीली है।
4.इस विधि में समग्र की प्रत्येक इकाई के सम्बन्ध में व्यापक सूचना प्राप्त हो सकती है।
5.यह विधि वहाँ पर उपयोगी होती है जहाँ पर समग्र की इकाइयाँ विजातीय हों ।

निदर्शन विधि
1.इस विधि में उच्चस्तरीय शुद्धता नहीं पायी जाती है तथा परिणामों में पूर्ण विश्वसनीयता का अभाव होता है।
2.इस विधि में समय कम लगता है और निष्कर्ष शीघ्रता से प्राप्त हो जाते हैं।
3.यह विधि अपेक्षाकृत कम खर्चीली है।
4.समय की प्रत्येक इकाई की सूचना प्राप्त नहीं होती वरन् प्रतिनिधि मदों की सूचना प्राप्त होती है।
5.यह विधि वहाँ पर उपयोगी सिद्ध हो सकती है जहाँ समग्र की सभी इकाइयाँ सजातीय हों ।








प्रश्न 13. चित्र बनाने के सामान्य नियमों को लिखिए ।

Answer is
उत्तर-चित्र रचना के सामान्य नियम-चित्र रचना करते समय निम्नलिखित आवश्यक बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक है-
(1) चित्र पर उचित शीर्षक होना चाहिए, जिससे ज्ञात हो जाए कि चित्र में क्या प्रदाशित किया गया है।
(2) चित्र आकर्षक, साफ और सुन्दर होने चाहिए।
(3) चित्र न तो बहुत बड़ा होना चाहिए और न बहुत छोटा। चित्र का आकार कागज के अनुसार होना चाहिए।
(4) चित्र रचना में पहले उपयुक्त पैमाना निर्धारित करना आवश्यक होता है। पैमाने द्वारा तथ्यों की विशेषताओं का भली-भाँति स्पष्टीकरण हो सके, इसलिए पैमाने का उल्लेख चित्र के एक कोने में कर देना चाहिए।
(5) चित्र के निर्माण में स्वच्छता की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए और रेखागणितीय उपकरणों; जैसे-परकार, पटरी इत्यादि का प्रयोग करना चाहिए।
(6) चित्र में प्रयुक्त रंगों या चिह्नों द्वारा किन-किन तथ्यों का प्रदर्शन किया गया है, यह चित्र के ऊपर एक कोने में दिया जाना चाहिए ।








प्रश्न 14. चित्रमय प्रदर्शन की सीमाएँ लिखिए | अथवा
रेखाचित्र प्रदर्शन की सीमाएँ लिखिए ।

Answer is
- चित्रमय प्रदर्शन की सीमाएँ- चित्रमय प्रदर्शन की निम्नलिखित सीमाएँ हैं-
(1) चित्रों द्वारा यथार्थ संख्यात्मक प्रदर्शन सम्भव नहीं है। वे सन्निकट मूल्यों पर आधारित होते हैं।
(2) चित्रमय निरूपण की उपयोगिता केवल सामान्य व्यक्ति के लिए है, विशेषज्ञों के लिए उसकी उपयोगिता सीमित ही है।
(3) यदि मापों के बीच अन्तर बहुत अधिक है, तो उस अन्तर को चित्र द्वारा प्रदशित करना कठिन होता है।
(4) चित्रों के रूप में बहुगुणी सूचनाएँ प्रदर्शित नहीं की जा सकतीं। (5) चित्रों का सरलता से दुरुपयोग किया जा सकता है। अलग-अलग पैमाने के आधार पर बने चित्र भ्रामक होते हैं।








प्रश्न 15. मिश्रित दण्ड चित्र के प्रकारों को समझाइए।

Answer is
उत्तर-मिश्रित दण्ड चित्र (Compound Bar Diagram) - इस बहुदण्ड चित्र भी कहते हैं। बहुगुणी दण्ड चित्रों का प्रयोग जब दो या दो से अधिक तथ्यों में तुलनात्मक अध्ययन करना हो, तब किया जाना चाहिए। एक समय से सम्बन्धित विभिन्न समंकों के दर्ण्ड चित्र आपस में साथ-साथ मिलाकर बनाये जाते हैं व प्रत्येक चर के मूल्य को प्रदर्शित करने के लिए अलग दण्ड बनाये जाते हैं। आँकड़ों को हमेशा आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना चाहिए तथा दण्डों के रंगों अथवा चिह्नों को स्पष्ट करने के लिए निर्दिष्टिका (Index) बनायी जाती है।








प्रश्न 16. एक आदर्श प्रश्नावली में कौन-कौन से गुण आवश्यक होते हैं ?

Answer is
उत्तर-एक अच्छी प्रश्नावली में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है- (1) प्रश्न छोटे और स्पष्ट हों-प्रश्नावली तैयार करते समय इस बात की ओर भी विशेष ध्यान देना चाहिए कि प्रश्न इस प्रकार के हों जिनके संक्षिप्त उत्तर दिये जा सकें, अर्थात् उत्तरों में 'न', 'हाँ', छोटे वाक्यांश या संख्याओं का प्रयोग हो सके।
(2) सीमित प्रश्न-प्रश्नावली का आकार उचित होना चाहिए और यथासम्भव सीमित प्रश्न रखें जाने चाहिए। यदि अनावश्यक और अधिक प्रश्न होंगे, तो उसे भरने से अधिक समय लगेगा और सूंचना देने वाला लापरवाही या उदासीनता दिखा सकता है।
(3) उँचित क्रम - प्रश्नावली में समस्त प्रश्नों को क्रमबद्ध रूप में व्यवस्थित किया जाना चाहिए।
(3) वर्जित प्रश्न - प्रश्नावली में इस प्रकार के प्रश्नों का समावेश नहीं करना चाहिए,जिनसे उत्तर देने वालों के आत्मसम्मान, व्यक्तिगत, धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को ठेस लगे।
(3) यथार्थता की जाँच-प्रश्नावली में कुछ ऐसे प्रश्नों को शामिल किया जाना चाहिए, जिनमें उत्तरों की फत्यता और सूचना देने वालों की विश्वसनीयता की जाँच हो सके।
(4)पूर्व परीक्षण-प्रश्नावली का निर्माण करने के पशचात् एक बार कुछ सूचकों पर विभिन्न प्रश्नों का पहले ही परीक्षण कर लेना चाहिए, जिससे कोई अशुद्धि या कमी होने पर आवश्यकतानुसार संशोधन या परिवर्तन किया जा सके।








प्रश्न 17. सारणी रचना के नियम बताइए। अथवा एक उत्तम सारणी की रचना किस प्रकार की जाती है ?

Answer is
उत्तर-सारणी रचना के प्रमुख नियम निम्न प्रकार हैं- (1) सारणी की रचना कागज के आकार के अनुरूप होनी चाहिए।
(2) सबसे ऊपर सारणी संख्या या सारणी का शीर्षक लिखना चाहिए।
(3) खानों एवं पंक्तियों की संख्या न तो बहुत ज्यादा होनी चाहिए और न बहुत कम होनी चाहिए।
(4) तुलनात्मक समको को साथ-साथ रखना चाहिए ।
(5) सारणी में द्वितीयक सामग्री का प्रयोग हुआ है, तो उसका उल्लेख करना चाहिए।
(6) सारणी के विभिन्न स्तम्भों का जोड़ करना भी आवश्यक है।
(7) अन्त में सारणी के नीचे ट्रिप्पणियाँ व स्रोतों को भी लिखना चाहिए।








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